पतंजलि में उत्साह से मना योग दिवस

acharya ji 21 june

पतंजलि में उत्साह से मना योग दिवस

Mon, 21 Jun 2021 05:10 PM: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सोमवार को बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण के सानिध्य में पतंजलि योगपीठ-।। स्थित योगभवन सभागार में योग दिवस मनाया गया। चारों वेद, उपनिषद्, दर्शन तथा श्रीमद्भगवतगीता की पावन ऋचाओं के वाचन के मध्य योग का शंखनाद करते हुए बाबा रामदेव ने स्वस्थ जीवन व निरोगी काया की प्राप्ति के लिए योग को एकमात्र साधन बताया। व्यष्टि से समष्टि तक की यात्रा है योग। यौगिक स्केटिंग, यौगिक जिम्नास्टिक, मल्लखम्भ, मल्लयुद्ध, यौगिक मुद्राओं और झांकियों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

बाबा रामदेव ने कहा कि आज के इस युग में योग धर्म सर्वोपरि है, योगधर्म ही युग धर्म, राष्ट्र धर्म, सेवा धर्म, मानव धर्म, अध्यात्म धर्म तथा भागवत धर्म है। योग में ही हमारी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक, धार्मिक तथा आध्यात्मिक सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान है। योग एक ब्रह्मास्त्र है जिससे हम अपने शरीरबल, मनोबल, आत्मबल को प्रबल करके अपने जीवन का निर्माण करते हुए अंत में निर्वाण मोक्ष को प्राप्त होते हैं। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि योग को विविध तरह से किया जा सकता है, उसके विविध अंग तथा आयाम हैं। योग के द्वारा विविध व्याधियों को नष्ट किया जा सकता है। स्वयं प्रधानमंत्री ने कहा है कि योग ने आम जनता की नहीं चिकित्सकों के जीवन की रक्षा करने में बड़ा योगदान दिया है। यह निर्विवाद है कि योग में अपार शक्ति है।

आचार्य ने कहा कि कोरोना काल की विषम परिस्थितियों ने दिखाया कि योग में कितनी शक्ति है। अब योग की परीक्षा नहीं, योग का आचरण होना चाहिए, योग का जीवन में आत्मसात होना चाहिए। हम योगी बनेंगे, तो निरोगी रहेंगे। जितना हम निरोगी होंगे उतना ही देश व समाज के लिए उपयोगी व उपकारी सिद्ध होंगे। इस अवसर पर बाबा रामदेव ने साध्वी देवप्रिया, डॉ. जयदीप आर्य, राकेश कुमार, सभी राज्य प्रभारी, युवा प्रभारी, सोशल मीडिया प्रभारी, सातों संगठनों के प्रभारी, रामाशीष, सचिन, विनोद आदि का संगठन में पूर्ण पुरुषार्थ के लिए अभिनंदन किया।

आचार्य ने किया वेबसाइट

का लोकार्पण पतंजलि योगसूत्र आधारित एक वेबसाइट का लोकार्पण आचार्य बालकृष्ण द्वारा किया गया। इस वेबसाइट के माध्यम से एक साथ पांच भाषाओं हिंदी, संस्कृत, जर्मन, फ्रैंच तथा अंग्रेजी में योगसूत्र उपलब्ध होंगे। इस कार्य में स्वामी विदेहदेव का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। Read More……