नई दिल्ली में CII के Young Indians National Summit – TAKE PRIDE-2017

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नई दिल्ली, 24 मार्च 2017| कल नई दिल्ली में CII के Young Indians National Summit – TAKE PRIDE-2017 में आए देश के व्यापार जगत के तमाम उद्यमियों के समक्ष मैंने अपने जो विचार रखे ,आप से भी साझा कर रहा हूँ–

• काम ऐसा करो जो तुम्हें सुकून दे। ऐसा बिजनेस करिए कि आपको रात को चैन से नींद आ जाए।
• आप ऐसी चीज बनाइए, जो आप अपने घर के बच्चों को खिला सकें। आप ऐसे वस्त्र और वस्तुएं बनाइए जो आपके परिवार के लोग इस्तेमाल कर सकते हों। यदि इतना ही सिद्धांत आप जीवन में अपना लें तो यह देश कहीं आगे और कहीं सुंदर दिखाई देगा
• बुद्धि कितनी भी अच्छी क्यों न हो, उसे लगाने वाला सही होना चाहिए।
• दुनिया में कोई आदमी बेकार नहीं है, सब काम के हैं। विश्वास करें अपनी टीम पर। काम करें एक Hierarchy की तरह, लेकिन जब एक बैठें तो एक परिवार की तरह।
• ऐसी भावना रखो कि रसोई में खाना पकाने वाली या खाना पकाने वाला भी आपके साथ बैठकर खा सके।
• आपके सिस्टम में काम करने वाले छोटे से छोटे व्यक्ति से यह पूछने में ज्यादा एनर्जी नहीं लगानी पड़ती कि, ‘‘कैसे हो भाई? ठीक हो? घर में सब ठीक है?’’ जरूरत पड़ती है तो बस अहंकार की सीढ़ी से एक पड़ाव नीचे उतरने की।
• बड़े से बर्तन में छोटा सा छेद होने से बूंद-बूंद गिरकर घड़ा खाली हो जाता है। लीकेज चाहे लाइफ का हो या सिस्टम का, उसे कभी अपनी लाइफ में मत आने दो।
• पुरुषार्थ के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
• पुरुषार्थ के लिए आप तैयार हैं तो दुनिया आपके लिए है।
• समझौतावादी नहीं पुरुषार्थवादी बनिए।
• दूसरों को बदलने की क्षमता आप पैदा कर लीजिए नहीं तो दूसरे तुमको बदल देंगे। इसमें कोई शक नहीं।
• किसी भी काम को करते हुए, समाज और राष्ट्र को सामने रखिए। यदि आप समाज के लिए काम करेंगे तो समाज आपको ऊपर चढ़ाएगा। फिर आपको ये सोचने की नौबत नहीं आएगी कि दुनिया ‘मुझे’ नहीं जानती है।
• सुख की कल्पना करोगे तो दु:ख पाओगे। जो भी काम करना है, आनंद के भाव से करिए। जो है उसका आनंद लो। जो नहीं है उसको क्यों तलाशते हो? जो है यदि उसको ही आप मानकर चलोगे तो जो नहीं है, वह भी आपसे दूर नहीं है।
• वातावरण और कल्चर का बहुत फर्क पड़ता है। जैसे वातावरण में आदमी रहता है, उस तरह का ढलता है। अच्छे वातावरण में आदमी स्वत: ही बुरी आदतों को छोड़ अच्छी आदतों को अपनाता है।
• जब हम छोटे होते हैं तो डर इसलिए नहीं होता है क्योंकि हम चालाकी नहीं करते हैं। बड़े होने पर डर इसलिए होता है क्योंकि हमारे भीतर चालाकी करने की प्रवृत्ति आ जाती है।

स्वामी जी और मेरी जोड़ी और विश्वास के संदर्भ में जब किसी ने कुछ पूछा तो मैंने कहा
• विश्वास तोड़ने का प्रयास सब जगह होता है। आपस में संवाद रखो। दूसरों की बातों पर नहीं। अपने संवाद पर भरोसा रखिए। चाहे खून का रिश्ता है या नहीं है, आप कहां से हैं, किसके साथ हैं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि दोनों के मन में खोट नहीं है तो तीसरा व्यक्ति खोट पैदा नहीं कर सकता। और यदि तुम्हारे अंदर खोट है तो उसको दूसरा भी नहीं मिटा सकता।

20000 लोगों की बड़ी टीम को मैनेज करने के संदर्भ में:
• कार्यक्षेत्र पर एक परिवार का वातावरण develop करो। हर एक को ये कहिए कि आप मालिक हैं। यदि ये काम आपका होता तो कैसे करते। बस उसे ये समझा दीजिए। हम हिंदुस्तानी इमोशन से बहुत जल्दी अटैच होते हैं। 15 दिन में-एक महीने में एक बार अपने employee के साथ बैठिए। जो आपके यहां काम करते हैं उनका प्रोत्साहन करिए। ऑफिस में उनकी भावनाओं को कभी भी आहत मत करिए। उनकी भावनाओं को एक तरफ किनारे पर मत रखिए। ऐसा करने पर आराम से मैनेज हो जाता है।

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